चमोली: उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है. यहां देवी मंदिर बहुतायत हैं. आज हम बात कर रहे हैं माता अनुसूया की. माता अनुसूया का मंदिर चमोली जिले में स्थित है. मंदिर के चारों ओर बाज के घने जंगल हैं. मंदिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर में जप और यज्ञ करने वालों को संतान की प्राप्ति होती है.
प्राचीन काल में यहां देवी अनुसूया का छोटा सा मंदिर था. सत्रहवीं सदी में कत्यूरी राजाओं ने इस स्थान पर अनुसूया देवी के भव्य मंदिर का निर्माण करवाया. अठारहवीं सदी में आए विनाशकारी भूकंप से मंदिर ध्वस्त हो गया. इसके बाद संत ऐत्वारगिरी महाराज ने ग्रामीणों की मदद से इस मंदिर का पुन: निर्माण करवाया.
पौराणिक कथा
मान्यता है कि इसी स्थान पर माता अनुसूया ने अपने तप के बल पर ब्रह्मा, विष्णु और शंकर को शिशु बनाकर पालने में खेलने पर मजबूर कर दिया था. बाद में काफी तपस्या के बाद त्रिदेवों को पुन: उनका रूप प्रदान किया. इसके बाद यहीं तीन मुखवाले(ब्रह्मा, विष्णु और महेश) दत्तात्रेय का जन्म हुआ. माता अनुसूया के इस मंदिर के पास ही दत्तात्रेय मंदिर की स्थापना भी की गई है.



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