देहरादून में आयोजित ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट (Global Investors Summit) इस बार कई मायनों में खास रहा। हालांकि 2018 में हुए ऐसे ही इंवेस्टर्स समिट से तुलना करने की कोई लाजमी वजह नहीं हो सकती है लेकिन लगता है कि इस बार पिछली बार की गलतियों से सीख ले ली गई थी।
इकोनॉमी की रफ्तार होगी तेज
इंवेस्टर्स समिट के दौरान तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक के एमओयू हो जाना निवेश के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है। अगर पच्चीस फीसदी भी निवेश धरातल पर उतरा तो ये भी उपलब्धि मानी जानी चाहिए। इस बार के इंवेस्टर्स समिट में एमओयू की ग्राउंडिंग पर सीएम धामी का खास फोकस दिखा। जब आप एमओयू और ग्राउंडिंग की बात करते हैं तो सरकारी आंकड़ों में लगभर 40 हजार करोड़ के आसपास के एमओयू धरातल पर हैं। राज्य सरकार का एक साल का कुल बजट 60 हजार करोड़ के आसपास पहुंच रहा है। ऐसे में अगर 40 करोड़ का निवेश आ जाता है तो आप उत्तराखंड की इकोनॉमी की रफ्तार का अंदाज लगा सकते हैं।



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